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गाँव में शादी में जाते समय निशा को बस में चोदा

मेरा नाम प्रमोद है। गाँव में शादी थी  एक रिश्तेदार के बेटे की , इसलिए पिताजी ने मुझे गाँव जाने को कहा। मेरी उम्र 26 साल है और मैं अविवाहित हूँ।

मैं 9 घंटे का सफर करके गाँव पहुँचा। शादी अगले दिन थी, इसलिए गाँव पहुँचते ही मैंने पूरा दिन आराम किया। मैं ज्यादा गाँव नहीं आता, इसलिए मुझे कोई पहचानता नहीं था।

नवंबर का महीना होने के कारण गाँव में बहुत ठंड थी। हर तरफ हरियाली छाई थी। माहौल बहुत सुहाना और मनमोहक हो गया था।

अगला दिन शुरू हुआ और मैं शादी के लिए तैयार होने लगा। तभी मैं घर के बाहर टहल रहा था कि पीछे से एक लड़की ने आवाज दी। मैंने पीछे मुड़कर देखा तो वह निशा थी। निशा मेरे 15वीं कक्षा में थी।

मैंने भी उसे पहचान लिया। निशा पास आई और मैंने उससे पूछा, “तू यहाँ कैसे?” उसने जवाब दिया, “मैं रिश्तेदार के घर शादी के लिए आई हूँ।” निशा से बात करते हुए पता चला कि वह उसी शादी में जा रही थी, जहाँ मैं जा रहा था। मैंने भी उसे बताया कि मैं भी आज शाम को शादी में जा रहा हूँ।

इस पर निशा बोली, “फिर तो बहुत अच्छा हुआ। मैं भी तेरे साथ चलती हूँ। हम दोनों एक साथ जाएँगे।” मैंने भी हामी भरी। फिर निशा बोली, “गाँववालों को ले जाने के लिए बस आने वाली है। हम उसमें चलें।” मैंने सहमति दी।

फिर निशा घर तैयार होने चली गई। मैंने भी खाना वगैरह खाया और शाम होते ही नए कपड़े पहनकर बाहर आया। निशा थोड़ी देर बाद आई और हम बातें करते हुए खड़े थे। गाँव के सारे लोग बस का इंतजार कर रहे थे।

कुछ देर बाद बस आई। मुझे भीड़ में चढ़ने की आदत नहीं थी, इसलिए मैं पीछे खड़ा रहा। देखते-देखते पूरी बस भर गई। अब अंदर जाने के लिए जरा भी जगह नहीं थी। मैं, निशा और 4-5 लोग बाहर रह गए। हमें अंदर जाने का मौका ही नहीं मिला।

कुछ देर तक बस ड्राइवर ने देखा कि क्या अंदर जगह हो सकती है। लेकिन अंदर जरा भी जगह खाली नहीं थी। सारे गाँववाले भीड़ करके खड़े थे। ड्राइवर ने एक बार तलाशी ली और बोला, “पीछे से एक और बस आ रही है, आप उस बस से आ जाओ।”

हमारे पास और कोई उपाय नहीं था। वह बस चली गई और हम दूसरी बस का इंतजार करने लगे। कुछ ही पलों में दूसरी बस आई। वह बस पूरी तरह खाली दिख रही थी। हम सब बहुत खुश हुए। बस रुकी और हम अंदर गए। अंदर जाते ही पता चला कि सारी सीटों पर लोग बैठे हुए हैं। ड्राइवर ने हमें सबसे पीछे जाने को कहा क्योंकि अगले गाँव से भी कुछ लोग आने वाले थे। मैं और निशा पीछे जाने लगे।

लेकिन पीछे की सीटों पर बड़े-बड़े डब्बे रखे थे। एक के ऊपर एक रखे डब्बों ने बस की पीछे की खिड़की पूरी तरह ढक दी थी। इसके साथ ही पीछे की पूरी सीट और आगे की दो-दो सीटें आसपास के सामान से भरी हुई थीं।

मैं सबसे पीछे जाकर खड़ा हो गया और निशा मेरे सामने खड़ी हो गई। हमारे दाएँ और बाएँ डब्बे रखे थे, जिससे पूरी जगह ढक गई थी।

कुछ देर बाद बस रुकी और अगले गाँव के लोग बस में चढ़ने लगे। लेकिन अचानक इतने लोग आए कि यह बस भी पूरी तरह भर गई। मैं और निशा सबसे पीछे सरक गए। हमारे सामने एक औरत अपने 5 साल के बच्चे के साथ थी।

बस भरते ही हमें अब खड़े होने के लिए भी ठीक से जगह नहीं थी। लेकिन अब बस में आने के बाद बाहर निकलना मुश्किल था। भीड़ में सरकते हुए निशा पूरी तरह मेरे शरीर से चिपक गई।

ड्राइवर ने जितने लोग हो सकते थे, उतने अंदर भरे और बस शुरू की। उस भीड़ में सब एक-दूसरे से चिपककर खड़े थे। बस शुरू होते ही निशा पूरी तरह पीछे सरक गई। बस के हिलने से उसकी पीठ मेरी छाती से बार-बार टकरा रही थी।

कुछ देर तक मैंने इसे नजरअंदाज किया, लेकिन फिर मुझमें का पुरुष जागने लगा। मैं एक सभ्य विचारों वाला लड़का हूँ। लेकिन निशा जैसी 26 साल की साँवली लड़की इतने करीब हो तो किसका मन नहीं डोलेगा। निशा दिखने में अच्छी थी, उसके 34 के स्तन और 35 की गांड देखकर किसी का भी मन उसे करीब आने का होगा।

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जैसे-जैसे बस घुमावदार रास्तों पर चलने लगी, बस में मौजूद सारे लोग आगे-पीछे होने लगे। सामने से आने वाले धक्कों की वजह से निशा की पीठ मेरी छाती पर और उसकी गांड मेरे लंड पर टकराने लगी। उसकी नरम गांड का स्पर्श लंड पर होते ही मेरा लंड तनने लगा।

मैंने काली पैंट और ऊपर सफेद रंग का फूलों की नक्काशी वाला शर्ट पहना था। धीरे-धीरे उन धक्कों से मेरा लंड पूरी तरह तन गया। अब मुझे निशा को छूने की तीव्र इच्छा होने लगी। लेकिन मन में डर भी बहुत था।

आसान उपाय के तौर पर मैंने थोड़ा आगे सरककर अपना शरीर पूरी तरह निशा की पीठ से चिपका दिया। इससे बस के हिलने से मेरा पूरा शरीर उसकी पीठ पर रगड़ने लगा। नीचे लंड भी गांड पर रगड़ने लगा। निशा ने इस पर कुछ नहीं कहा और चुपचाप खड़ी रही।

धीरे-धीरे अंधेरा होने लगा। हम पीछे डब्बों के बीच थे, इसलिए वहाँ और ज्यादा अंधेरा हो गया था। कुछ देर बाद तो मुझे अपने जूते भी दिखना बंद हो गए, इतना अंधेरा हो गया। बस पहाड़ों के बीच से गुजर रही थी। अगले गाँव तक पहुँचने में अभी कम से कम एक घंटा लगने वाला था।

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यहाँ मेरे लंड की हालत खराब होती जा रही थी। लंड को अब बहुत खुजली होने लगी थी। कुछ देर बाद मैंने हिम्मत करके बस के हिलते समय अपना दायाँ हाथ निशा के कंधे पर रख दिया। निशा ने इस पर कुछ नहीं कहा और न ही उसने मेरा हाथ हटाया। वह वैसे ही चुपचाप खड़ी रही।

कुछ देर मैं ऐसे ही पीछे से निशा से चिपककर और एक हाथ कंधे पर रखकर खड़ा रहा। तभी ड्राइवर ने अचानक तेज ब्रेक मारा। उस झटके से मेरा बायाँ हाथ निशा की कमर पर चला गया। मैंने निशा को कमर से पकड़ लिया। जैसे ही मैंने उसकी कमर पर हाथ रखा, उसने भी अपना हाथ मेरे बाएँ हाथ पर रखा और मेरा हाथ आगे खींचकर पूरी कमर पर सरका दिया।

यह देखकर मैं बहुत खुश हुआ। मेरा हाथ अब पूरी तरह निशा की कमर पर था। और हम जैसे बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड की तरह एक-दूसरे से चिपककर खड़े थे। बस में अंधेरा होने की वजह से मुझे और उत्साह महसूस होने लगा।

मैंने कुछ देर बाद दायाँ हाथ भी नीचे कमर पर लाया और आगे सरकाते हुए निशा को पीछे से कसकर गले लगाया। गले लगाते ही मैंने निशा को पीछे से कसकर दबाया और नीचे से लंड भी गांड पर दबाया।

इसके बाद मेरे हाथों का खेल शुरू हो गया। मैं धीरे-धीरे अपनी उंगलियाँ निशा के पेट पर फिराने लगा। दायाँ हाथ पेट पर फिराते हुए मैं ऊपर सरकने लगा। इसके साथ ही मैंने अपना मुँह निशा की गर्दन के पास लाया और धीरे से उसकी गर्दन पर चुम्मी ली। चुम्मी लेते ही निशा थोड़ा हड़बड़ा गई, लेकिन कुछ बोली नहीं।

मैंने फिर दूसरी तरफ गर्दन पर चुम्मी ली। मैंने अपने होंठ निशा की गर्दन पर टिकाए रखे और उसकी गर्दन को होंठों का स्पर्श देने लगा। जीभ से उसकी गर्दन चाटने लगा।

मुझे अब निशा के स्तन दबाने की तीव्र इच्छा हुई। लेकिन डर था कि आगे खड़ी औरत अगर पीछे देखेगी तो उसे पता चल जाएगा कि हम यहाँ क्या कर रहे हैं। लेकिन अब इतने करीब आने के बाद हिम्मत किए बिना कुछ फायदा नहीं था।

मैंने धीरे-धीरे अपना दायाँ हाथ निशा के पेट से ऊपर सरकाना शुरू किया। कुछ देर बाद मेरा हाथ निशा के दाएँ स्तन पर था। मैं धीरे-धीरे निशा का दायाँ स्तन दबाने लगा। उसका स्तन बहुत नरम लग रहा था, जैसे रुई भरी हो।

निशा का एक स्तन दबाते ही मेरा आत्मविश्वास चरम पर पहुँच गया। क्योंकि मुझे भी समझ आ गया कि निशा को भी यही चाहिए। मैंने तुरंत बायाँ हाथ उसके दूसरे स्तन पर लाया और दोनों हाथों से उसके दोनों स्तन दबाने लगा।

स्तन दबाते समय मेरा लंड उछलने लगा। मैंने पीछे से अपना लंड उसकी गांड पर रगड़ना शुरू किया। इसके साथ ही मैं निशा की गर्दन पर चुम्मियाँ लेने लगा। निशा भी अपनी गर्दन टेढ़ी करके गर्दन का आगे का हिस्सा चूसने के लिए देने लगी। मेरा पूरा शरीर अब तपने लगा था।

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कुछ देर बाद मैंने अपने दोनों हाथ नीचे लाए। और निशा के कुर्ते के अंदर दायाँ हाथ डाला और उसके पेट से हाथ ऊपर सरकाते हुए स्तन तक पहुँचा। अब मेरा हाथ निशा की ब्रा के ऊपर से उसके स्तन दबा रहा था। मैंने अपनी बीच की उंगली उसके दोनों स्तनों के बीच रखी और ऊपर-नीचे रगड़ने लगा। फिर दूसरा हाथ भी मैंने कुर्ते में डाला और दोनों हाथों से उसके स्तन जोर-जोर से दबाने लगा।

स्तन दबाते-दबाते मैंने उसकी ब्रा ऊपर की और निप्पल को उंगलियों से पकड़ा और जोर-जोर से निप्पल भी दबाने लगा। निशा को यह दर्द होने लगा। वह चिल्लाना चाहती थी, लेकिन उसने एक हाथ अपने मुँह पर रखा और खुद को आवाज करने से रोक लिया।

जरा भी आवाज हुई होती तो आगे खड़ी औरत को पता चल जाता। मैं स्तन दबाना जारी रखा। तभी बस फिर से रुकी तो मुझे तुरंत हाथ बाहर निकालना पड़ा। निशा भी फिर से ठीक से खड़ी हो गई।

बस ड्राइवर गाँव का पता एक दुकानदार से पूछ रहा था। बस फिर से शुरू हुई। अब केवल आधा घंटा बाकी था गाँव पहुँचने में। मेरे पास ज्यादा समय नहीं था। इसलिए बस शुरू होते ही मैंने फिर से निशा को पीछे से कसकर गले लगाया। और इस बार मैंने अपने दोनों हाथ निशा के पायजामे के पास लाए और उसकी जाँघों पर हाथ फिराने लगा।

निशा की जाँघों पर हाथ फिराते हुए मैं ऊपर आने लगा। निशा ने नीचे पायजामा पहना था। मैं उसकी जाँघों पर हाथ फिराते हुए ऊपर उसकी कमर पर आया और उसका पायजामा पकड़ने लगा। उसके पायजामे में इलास्टिक थी, इसलिए मैंने तुरंत ऊपर से अपना दायाँ हाथ पेट पर फिराते हुए नीचे लाया और पायजामे के अंदर मेरा हाथ सरकाने लगा।

मुझे निशा के मुँह से निकलने वाली आवाज धीरे-धीरे सुनाई देने लगी।

आह आ आह आह्हह आह्हह्ह आह्ह

उसकी साँसें तेज हो रही थीं।

लेकिन बस की तेज आवाज की वजह से उसकी आवाज फैल नहीं रही थी।

मैंने धीरे-धीरे दायाँ हाथ निशा के पायजामे में नीचे लिया और उसकी चड्डी पर हाथ फिराने लगा। तब मुझे लगा कि निशा की चड्डी पूरी तरह गीली हो चुकी है। मेरा हाथ उसकी चूत पर लगते ही निशा फिर से हड़बड़ा गई।

मैंने फिर हाथ फिराते हुए चड्डी में धीरे से डाला और धीरे-धीरे अंदर हाथ सरकाते हुए निशा की चूत की दरार ढूँढने लगा। जैसे ही चूत की दरार उंगली को मिली, मैंने तुरंत अपनी बीच की उंगली चूत की दरार में नीचे सरकाई। उंगली अंदर जाते ही निशा ने अपने पैर पूरी तरह सटाए और मेरी उंगली चूत में फँसा दी।

निशा की चूत बहुत गीली हो चुकी थी। मेरा हाथ भी चूत के पानी से गीला हो गया। मैंने उंगली चूत की दरार में धीरे-धीरे ऊपर-नीचे करने लगा। गर्म चूत में उंगली ऊपर-नीचे होने लगी। उसकी चूत की गर्मी से मेरा लंड उछलने लगा। लंड को अब बाहर आने की चाह थी।

मेरे शरीर की आग बहुत बढ़ गई थी। चूत में उंगली ऊपर-नीचे करते समय मैंने बायाँ हाथ पीछे लाया। निशा के पायजामे में अंदर हाथ डाला और निशा की गांड जोर-जोर से दबाने लगा। कुछ देर निशा की चूत और गांड दबाने के बाद मैंने तुरंत हाथ बाहर निकाला।

फिर मैं थोड़ा पीछे सरका और अपनी काली पैंट का बटन खोला और चेन नीचे की और अंदर की चड्डी समेत मैंने अपनी पैंट घुटनों तक नीचे कर दी।

लंड बाहर आते ही मैं पागल हो गया। फिर मैंने दोनों हाथ निशा की कमर पर लाए और धीरे से निशा का पायजामा पीछे से नीचे खींचा और उसकी चड्डी भी नीचे कर दी।

नीचे सरकाते ही निशा की गांड पीछे से नंगी हो गई। मैंने तुरंत अपना तना हुआ लंड निशा की गांड की दरार में दबाया। निशा पूरी तरह चौंक गई। मैंने उसे पीछे से कसकर गले लगाया।

वह आह भरने लगी। उसके मुँह से आवाज आने लगी।

आह्हा आह्हह्ह अह्ह्हह्ह अह्ह्ह आह्हह्ह अह्ह्हह्हह्हह्ह

लेकिन आसपास डब्बे होने की वजह से किसी को हमें देखने की चिंता नहीं थी। इसके साथ ही बस में अंधेरा होने की वजह से हम किसी को दिखने वाले नहीं थे।

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मैंने पीछे से निशा की गांड की दरार में ऊपर-नीचे लंड रगड़ना शुरू किया। लंड का पानी गांड पर लगने लगा। फिर कुछ देर बाद मैंने धीरे से लंड नीचे लाया और चूत पर टिकाया।

चूत पहले से ही बहुत तप चुकी थी और उसमें से पानी टपक रहा था। मैंने धीरे से अपना लंड हाथ में पकड़ा और चूत के छेद पर टिकाते हुए धीरे-धीरे अंदर घुसाने लगा। निशा ने भी जवाब देते हुए थोड़ा झुककर मेरे लंड को चूत में जाने के लिए जगह खाली कर दी।

उसके झुकने से लंड आसानी से चूत में घुस गया। अंदर जाते ही मैंने निशा की कमर दोनों हाथों से पकड़ी। मैंने अपने पैर थोड़े फैलाए।

लेकिन पैर फैलाते समय एक गड़बड़ हो गई। मेरी पैंट, जो घुटनों तक थी, अचानक नीचे गिर गई। पैंट और चड्डी दोनों पूरी तरह नीचे गिर गए। लेकिन अब पैंट वापस ऊपर करने का समय नहीं था। मैंने वैसे ही पैर फैलाकर खड़ा रहा और लंड को चूत में पीछे-आगे करने लगा।

निशा की गर्म चूत में मेरा 7 इंच का लंड अंदर-बाहर होने लगा। चूत से और ज्यादा पानी निकल रहा था। बस के हिलने से भी लंड पीछे-आगे हो रहा था। मैंने धीरे-धीरे रफ्तार बढ़ाई और जोर-जोर से निशा को चोदने लगा।

निशा अपने मुँह पर हाथ रखकर खुद को संभाल रही थी।

निशा की चूत चोदते-चोदते मैं इतना मदहोश हो गया कि मन में मैं निशा को गालियाँ देने लगा।

चोद दी साली… रंडी की… तेरी माँ की गांड…

आह्ह अहाहा अहाहा आहाहाहा अहाहाहाहाहाहा मदरचोद निशा अअअअअ आ आ भड़वी निशा आहाहाहाहाहा अह्ह्ह अह्ह्ह चूत चोद ले अह्ह्ह अह्ह्ह

जोर-जोर से चोदते समय निशा की गांड पर मेरी जाँघ टकराने लगी। नसीब से बस की आवाज बहुत तेज थी, इसलिए किसी को कुछ सुनाई नहीं दिया।

कुछ देर चोदते-चोदते निशा ने अपने पैर पूरी तरह सटा लिए और मेरे लंड को चूत में कसकर दबा लिया। लेकिन मैंने चोदना नहीं रोका। लंड चूत में अंदर-बाहर हो रहा था। तभी निशा ने एक जोर का साँस लिया और उसने पानी छोड़ दिया। उसकी कमर पकड़े हुए मुझे उसके शरीर में जैसे बिजली दौड़ने का अहसास हुआ।

तभी चोदते समय मुझे लंड पर गर्म पानी लगने लगा। मुझे समझ आ गया कि निशा का पानी निकल गया। मैं भी अब आखिरी पल पर पहुँच चुका था। मैंने निशा को जोर-जोर से चोदना शुरू किया।

चोदते-चोदते मेरा लंड आखिरी पल पर आया और मैंने तुरंत लंड बाहर निकाला और निशा की गांड की दरार में लंड घुसा दिया। लंड का सारा पानी मैंने निशा की गांड की दरार में उड़ा दिया। लंड से पानी का बड़ा फव्वारा उड़ा। मेरा पूरा लंड चिपचिपा हो गया। फिर मैंने अपना लंड निशा की गांड पर रगड़ा और पोंछ लिया।

धीरे-धीरे मैं शांत हो गया। मैं पीछे सरका और पैंट पहनने लगा। निशा ने भी अपने कपड़े ठीक किए। मैंने कपड़े पहनकर सीधा खड़ा हो गया, लेकिन अब मैं बहुत खुश था। मैंने निशा को अब प्यार से पीछे से पकड़ा। कुछ देर मैंने निशा को पीछे से कसकर गले लगाकर खड़ा रहा। ऐसा लगने लगा कि निशा की जाँघ पर सिर रखकर सो जाऊँ।

कुछ देर बाद बस गाँव में पहुँच गई। हम दोनों नीचे उतरे। बस से उतरने के बाद मुझे निशा की आँखें देखने को मिलीं। उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी। उसका चेहरा निखर रहा था। जो कुछ हुआ, उससे हम दोनों बहुत खुश थे।

इसके बाद हमने कई बार चुदाई की। निशा ने मुझे बहुत आनंद दिया।

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