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दीदी की दोस्त ने पैंटी दिखाकर चूत चुदवाई

टॉप सेक्स कहाणी के प्यारे दोस्तों को मेरा नमस्ते। मैं भोपाल से अजय हूँ। मैं नवविवाहित हूँ और अन्तर्वासना का नियमित पाठक हूँ। मैं यहाँ की हर कहानी पढ़ता हूँ।

आज मैं अपनी सच्ची कहानी साझा करने जा रहा हूँ। अन्तर्वासना पर ये मेरी दूसरी सेक्स कहानी है। सेक्स मुझे हमेशा पसंद रहा है और इसकी लत मुझे मेरी बड़ी बहन की कुछ सहेलियों ने लगाई थी। जी हाँ, मेरी दीदी की सहेलियों ने मुझे सेक्स का स्वाद चखाया। आप इस बात से अंदाज़ा लगा सकते हैं कि मेरी कहानी किस दिशा में जाएगी।

ये घटना तब की है, जब मेरी दीदी की सहेली ने मुझे नंगा करके मेरे साथ सेक्स किया था।

उस समय मैं जवान था। मैं पतला-दुबला और कम बोलने वाला था। अपनी क्लास में सबसे भोला माना जाता था। मुझे चीज़ें जल्दी समझ नहीं आती थीं। लेकिन जैसे-जैसे मैं बड़ा हुआ, मेरा लंड हमेशा उत्तेजित रहने लगा। छोटी कक्षा तक दीदी मुझे नहलाती थीं, तब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा हो जाता था। लेकिन मैंने कभी गलत नहीं सोचा। इसीलिए घर और कॉलोनी में मुझे सभी भोला मानते थे, और मैं था भी।

अब मैं बारहवीं में था। दीदी भी बड़ी कक्षा में थी। बारहवीं तक आते-आते मुझे सेक्स की काफी जानकारी और रुचि हो गई थी। मैंने कई बार मुठ मारी थी, लेकिन अब तक मुझे किसी चूत के असली दर्शन नहीं हुए थे। बस पोर्न में ही चुदाई, चूत और मम्मे देखता था।

मेरी कॉलोनी में दीदी की एक क्लासमेट रहती थी, जिसका नाम रानी था। रानी और दीदी साथ कॉलेज जाते थे और कभी-कभी पढ़ाई के लिए हमारे घर भी आते थे। इसीलिए मैं रानी से खुलकर बात करता था।

रानी का बदन बहुत आकर्षक और भरा हुआ था। उसके दूध बड़े और तने हुए थे। मैं सोचता था कि उसकी मादक चूचियों और उभरी गांड को देखकर कोई भी मुठ मार लेगा। ऐसा कामुक बदन था रानी का।

रानी से अच्छी जान-पहचान थी, इसलिए मैं कभी-कभी उसके घर जाता था। वो मुझे छोटा भाई कहकर बुलाती थी। शुरू में मैं रानी को बहन मानता था। लेकिन जब से मुझे सेक्स की लत लगी, मैं उसके मादक बदन को देखकर मुठ मारने लगा।

जब भी रानी मुझे अपने घर बुलाती, मैं उसके बाद उसके बाथरूम में उसकी ब्रा या पैंटी को अपने लंड पर रगड़कर मुठ मार लेता था।

एक दिन रानी घर में अकेली थी और बोर हो रही थी। मैं स्कूल से लौटते वक्त उसे दिखा, तो उसने मुझे आवाज़ देकर घर बुला लिया।

मैं गया, तो रानी बोली- आज मैं अकेली हूँ और बोर हो रही हूँ।
मैंने पूछा- अंकल-आंटी कहाँ गए?
उसने बताया- मम्मी-पापा शादी में बाहर गए हैं। तू हाथ-पैर धोकर, खाना खाकर मेरे घर आ। हम ताश खेलेंगे।

मुझे उसके साथ ताश खेलने में मज़ा आता था, क्योंकि जब वो झुककर पत्ते बाँटती, तो मुझे उसकी चूचियों के दर्शन हो जाते थे।

मैं जल्दी घर गया, खाना खाया, मम्मी को बताकर रानी के घर चला गया।

रानी शायद मेरा इंतज़ार कर रही थी। उसने ड्रेस बदल ली थी और एक छोटी सी फ्रॉक पहन रखी थी। फ्रॉक से उसके घुटनों से नीचे का हिस्सा दिख रहा था। मैंने चोरी-छिपे देखा कि उसके पैरों पर हल्के-हल्के बाल थे और पैर गोरे चमक रहे थे। उसके पैर देखकर मेरा लंड कड़क होने लगा, लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकता था।

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हम पलंग पर ताश खेलने बैठ गए। मैं उस दिन हाफ पैंट पहनकर गया था। रानी की फ्रॉक पहले से ही छोटी थी, और बैठते ही उसकी फ्रॉक जाँघों तक चढ़ गई। उसकी गोरी, मांसल जाँघें देखकर मेरे मन में लड्डू फूटने लगे। उसने फ्रॉक नीचे करके जाँघें छुपाईं, लेकिन मेरा मन ताश से हटकर सेक्स पर चला गया।

मैंने कभी चूत नहीं देखी थी, इसलिए मेरा मन व्याकुल था। तभी खेलते-खेलते रानी की फ्रॉक अपने आप ऊपर उठी, या शायद उसने जानबूझकर उठाई। ये उसे ही पता था।

हम ताश में मन लगाने लगे। खेलते-खेलते हम हँसी-मज़ाक भी कर रहे थे।

तभी रानी बोली- यार, बैठे-बैठे तो मैं अकड़ गई हूँ।
ये कहकर उसने तकिए का सहारा लिया और एक तरफ बैठ गई। उसने एक पैर मोड़ा और दूसरा पैर उसके ऊपर रख दिया। इससे उसकी फ्रॉक ज़्यादा ऊपर नहीं हुई, लेकिन उसकी पैंटी मुझे दिखने लगी।

उसकी पैंटी देखते ही मेरे लंड में हलचल शुरू हो गई। मेरी पैंट में तंबू बन गया। मेरी हालत खराब होने लगी। मेरा ध्यान ताश से हटकर उसकी पैंटी पर चला गया। उसने गुलाबी पैंटी पहनी थी। शायद उसने चूत के बाल साफ नहीं किए थे, क्योंकि पैंटी पर कुछ काला-काला दिख रहा था।

रानी ने ज़्यादा हलचल नहीं की, लेकिन बार-बार अपनी पैंटी मुझे दिखा रही थी।

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मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ। मैंने बाथरूम का बहाना बनाया और उसके वॉशरूम में जाकर रानी का नाम लेते हुए मुठ मारने लगा। थोड़ी देर में मैंने सारा वीर्य निकाल दिया। उसकी पैंटी और गोरी टाँगें देखकर ही मेरे लंड से पिचकारी निकल गई थी।

जब मैं वापस कमरे में गया, तो वो पलंग पर लेटी थी और पूछ रही थी- बाथरूम में इतनी देर क्या कर रहे थे?
मैंने बात टाल दी और थोड़ी देर में घर लौट आया।

दो दिन बाद रानी मेरे घर आई और बोली कि आज भी वो अकेली है, तो ताश खेलने आ जा।
थोड़ी देर बाद मैं उसके घर पहुँचा और बेल बजाई। उसने दरवाज़ा खोला।

उसे देखकर मैं हैरान रह गया। शायद उसने ब्रा नहीं पहनी थी। उसने टाइट फ्रॉक पहनी थी, जिसमें उसके निप्पल के उभार दिख रहे थे।

हम फिर ताश खेलने लगे। आज मैंने अंडरवियर नहीं पहना था, बस हाफ पैंट और शर्ट में गया था।

कुछ देर खेलने के बाद वो तकिया लेकर पलंग के एक तरफ बैठ गई और बोली कि आज उसकी कमर में ज़्यादा दर्द है।

उसके ऐसे बैठने से मुझे फिर उसकी पैंटी दिखने लगी। मेरा मन उसकी पैंटी खोलकर चूत देखने का हो रहा था। आज उसने नीली पैंटी पहनी थी। मेरा ध्यान ताश से पूरी तरह हट गया था।

थोड़ी देर बाद वो बोली- अब मेरा ताश खेलने का मन नहीं है, कुछ और खेलें।
मैंने भी हामी भर दी।

फिर उसने कहा- यार, मेरी कमर में आज भी दर्द है।
मैंने कहा- लाओ, मैं तेल लगाकर मालिश कर देता हूँ।

मेरे मन में स्वार्थ था, क्योंकि मुझे उसे नंगी देखना था।

वो झट से राज़ी हो गई और तेल लेने किचन चली गई।

तभी डोरबेल बजी और उसकी चचेरी बहन आ गई। मेरा चूत देखने का सपना फिर टूट गया। लेकिन मुझे समझ आ गया कि शायद वो मुझसे कुछ करवाना चाहती है।

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दो दिन बाद रविवार को दीदी ने रानी के नोट्स लौटाने के लिए मुझे उसके घर भेजा।

मैंने बेल बजाई, तो उसकी माँ ने दरवाज़ा खोला। वो बोलीं- अंदर आ जा, रानी अंदर है, वो तेरा इंतज़ार कर रही थी। मैं उसकी मौसी के घर जा रही हूँ। रानी की शादी पक्की होने वाली है, उसी की बात करने जा रही हूँ। मुझे देर हो सकती है, अगर तुझे समय हो, तो रुक जाना।

मैंने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर अंदर आ गया। उस वक्त रानी के पापा भी ड्यूटी पर थे। मतलब वो फिर अकेली थी।

मुझे देखते ही रानी खुश हो गई। उसने ताश की गड्डी निकाली और हम खेलने लगे। मैंने उसकी शादी की बात नहीं छेड़ी। आज मैंने ठान लिया था कि रानी की चुदाई करनी है।

कुछ देर खेलने के बाद उसने फिर पैर पलंग के किनारे रखे और मुझे उसकी गुलाबी पैंटी दिखने लगी। मेरा लंड खड़ा होकर मचलने लगा।

मैं उसकी चूत देखने का तरीका सोच रहा था कि उसने पैर उठाते हुए पैंटी दिखाई और बोली- यार, मेरी कमर का दर्द नहीं जा रहा, आज तो और ज़्यादा है। तू थोड़ा दबा दे।

मैंने उसे लेटने को कहा और उसकी कमर दबाने लगा। फिर उसने पीठ भी दबाने को कहा। मैंने पूरे मन से उसकी कमर और पीठ दबाई। उसके बदन को पहली बार छूते ही मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया।

वो पलट गई और पैर व जाँघें दबाने को बोली। मैं धीरे-धीरे उसकी जाँघों तक पहुँच गया। मेरा लंड पैंट फाड़ने को तैयार था।

अचानक वो उठी और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। मैं कुछ समझ पाता, उसने मुझे चूमना शुरू कर दिया। शायद वो सेक्स के लिए मचल रही थी। मैं भी उसके शरीर से खेलने लगा। हम बिना बोले एक-दूसरे से लिपटकर रगड़ रहे थे।

उसने अपना हाथ मेरी पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर रख दिया। मैंने झट से पैंट नीचे करके लंड उसके हाथ में दे दिया।

हमारी हालत खराब हो रही थी। मैंने उसकी फ्रॉक ऊपर करके पैंटी नीचे कर दी। आखिरकार मुझे उसकी चूत के दर्शन हुए। उसकी फूली हुई चूत पर हल्के-हल्के बाल थे।

जिस चूत के लिए मैं तड़प रहा था, वो मेरे सामने थी। मैंने उसकी चूत में उंगली डाली, तो वो अकड़ने लगी। उसके मुँह से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ निकलने लगा। उसकी चूत गर्म भट्टी सी हो गई थी और उसमें से सफेद पानी निकल रहा था।

मैं उसकी चूत सहला रहा था और वो मेरे लंड से खेल रही थी। अचानक उसने मेरे लंड का सुपारा पीछे किया, जिससे मुझे थोड़ा दर्द हुआ।

फिर हम 69 की पोजीशन में आए और एक-दूसरे को चूमने-चाटने लगे। वो मेरे लौड़े को सहलाने लगी और मैं उसकी चूत चाटने लगा। मैंने उसे मेरा लंड चूसने को कहा, लेकिन उसने मना कर दिया।

हमसे रहा नहीं गया। मैंने उसे सीधा किया और धीरे से उसकी चूत में लंड डालने लगा। उसे दर्द हो रहा था, लेकिन वो दर्द सहते हुए लंड डलवा रही थी। कुछ देर में मेरा पूरा लंड उसकी चूत में घुस गया।

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वो मुझसे रुकने को बोली और अपनी चूचियाँ चूसने को कहा। मैं लंड डाले हुए उसकी चूचियाँ चूसने लगा।

कुछ ही पलों में वो लंड झेल गई और गांड मटकाने लगी। अब उसे दर्द नहीं हो रहा था। मैंने धक्के लगाए, तो वो मस्ती से मेरे लंड को अपनी चूत में अंदर-बाहर करवाते हुए गांड उछालने लगी।

उसके मुँह से ‘आह आह आह… मुझे चोदो… मेरी चूत फाड़ दो… उम्म्ह… अहह… हय… ओह…’ निकल रहा था। वो बार-बार चिल्ला रही थी। मेरा लंड उसकी चूत फाड़ने के लिए बना था। मैं पूरे जोश से चूत फाड़ने में जुटा था। मुझे पता था कि रानी की शादी होने वाली है, शायद फिर मौका न मिले।

मैं उसे धकापेल चोदने लगा। करीब दस मिनट की चुदाई में रानी एक बार झड़ चुकी थी। आखिरकार मेरे लंड ने दम छोड़ दिया और मैंने सारा वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया।

हम दोनों पसीने से तर होकर हाँफते हुए पलंग पर गिर गए। हमें पूरी संतुष्टि मिली थी। कुछ देर बाद हम अलग हुए और बाथरूम जाकर एक-दूसरे को साफ किया।

मैं उसकी मम्मी के आने तक रुका, जो देर शाम को लौटने वाली थीं।

थोड़ी देर बाद मैं फिर चार्ज हो गया। वो बेड पर लेटकर मेरे लंड से खेलने लगी। सुपारा बार-बार ऊपर-नीचे करने लगी। शायद उसे भी लग रहा था कि लंड फिर कब मिले।

थोड़ी देर मसलने के बाद मेरा लंड खड़ा हो गया। वो चूत चटवाने लगी। मैं उसकी चूत को इत्मीनान से चाटने लगा। मुझे उसका रस अच्छा लगने लगा। मैं उसके भगोष्ठों पर काटने लगा। वो कामांध हो गई। थोड़ी देर में उसने ढेर सारा पानी छोड़ दिया। मैंने उसका रस पी लिया।

मैंने उसे मेरा लंड चूसने को कहा, लेकिन उसने मना कर दिया।
वो बोली- इसे चूत में डालो, मैं लंड नहीं चूस सकती।

मैंने उसकी चूत में लंड डाला और चोदने लगा। इस बार की चुदाई बहुत मस्त थी। वो दो बार झड़कर मुझे मज़ा दे रही थी।

उस दिन मैंने उसे चार बार चोदा। दिनभर की चुदाई से उसकी चूत में सूजन आ गई थी और मेरे लंड में भी दर्द होने लगा था। लेकिन चुदाई में हमें परम आनंद आ रहा था।

उसके बाद उसे चोदने का मौका नहीं मिला, क्योंकि उसकी जल्द ही शादी हो गई।
आज भी वो चुदाई मुझे याद आती है। मेरी भी शादी हो गई है, लेकिन मेरा सपना कि कोई मेरा लंड चूसे, अधूरा रह गया।

आपको मेरी कहानी कैसी लगी, कृपया बताएँ। आपके जवाब के बाद मैं दीदी की दूसरी सहेलियों की चुदाई की कहानियाँ लिखूँगा। अब इजाज़त दीजिए, जल्द ही नई चुदाई की कहानी के साथ हाज़िर हूँगा।

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