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पड़ोस कि आंटी के साथ सेक्स

नमस्ते दोस्तों, मेरा नाम मोहित है। मैं कुचामन का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में मैं, मेरी छोटी बहन, मम्मी और पापा हैं। मैं अपनी पड़ोस कि आंटी के साथ सेक्स की सच्ची कहानी आपके सामने लाया हूँ।

हमारे घर के पास एक परिवार रहता है, जिन्हें मैं अंकल-आंटी कहता हूँ। उनकी शादी को 7 साल हुए थे, और उनका एक छोटा बेटा भी है। हमारे घर अगल-बगल होने के कारण रिश्ता घर जैसा है। आंटी हमारे घर आती-जाती रहती हैं। आंटी का फिगर 34-32-36 है, और उनकी चाल-ढाल हर किसी को दीवाना बना देती है।

मैं शुरू से आंटी को पसंद करता था। वो खुले विचारों वाली थीं, और मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में भी जानती थीं। मैं कभी-कभी मजाक में उनकी गर्दन या गांड पर हाथ फेर देता था, जो मुझे बहुत अच्छा लगता था।

एक दिन आंटी का फोन खराब हो गया। वो हमारे घर लैंडलाइन से फोन करने आईं। फोन न लगने पर उन्होंने मुझे फोन लगाने को कहा। मैं फोन लगाने के बहाने उनकी गांड से सट गया और लंड को उनकी गांड पर सेट करके फोन लगाने लगा। आंटी को फोन दे दिया, और जब तक वो बात कर रही थीं, मैं बाथरूम जाकर उनके नाम की मुठ मार आया।

वापस रूम में आकर बैठा, तो आंटी मेरे पास बैठ गईं। हम बातें करने लगे, और बात सेक्स पर चली गई। मैंने उनकी सेक्स लाइफ के बारे में पूछा। आंटी ने बताया कि अंकल काम में व्यस्त रहते हैं और साल में बस 10-12 बार ही सेक्स करते हैं, अब तो बिल्कुल भी नहीं।

मैंने मजाक में कहा- मैं आपकी मदद कर दूँ?
आंटी ने कातिलाना मुस्कान दी और अपने घर चली गईं।

थोड़ी देर बाद मैं उनके घर गया। उनका बेटा सो रहा था, और वो बेडशीट ठीक कर रही थीं। मैंने पीछे से उन्हें पकड़ लिया। आंटी बोलीं- ये सही नहीं, कोई आ जाएगा।
लेकिन वो घूमीं, और मेरे होंठ उनके होंठों से मिल गए। मैं चूमने लगा। आंटी पहले छुड़ाने की कोशिश करती रहीं, फिर साथ देने लगीं। मैंने उनके कुर्ते के ऊपर से मम्मे दबाए, और वो सिसकारियाँ लेने लगीं। तभी मम्मी का फोन आ गया, तो मुझे जाना पड़ा। मैंने आंटी को चूमकर कहा- तुम सलवार-कुर्ते में बहुत अच्छी लगती हो।

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अगले दिन आंटी फिर फोन करने आईं। वो काले सलवार-कुर्ते में कयामत लग रही थीं। घर पर कोई नहीं था। मैंने फोन लगाकर दिया और उनके पास बैठ गया। मैं उनके होंठ, गर्दन और फिर कुर्ते के अंदर हाथ डालकर मम्मे दबाने लगा। मैंने उनकी ब्रा के हुक खोले और कुर्ते के ऊपर से मम्मों को काटने लगा। मैंने उनकी नाभि चाटी, और वो गर्म होने लगीं। उन्होंने मेरी टी-शर्ट में हाथ डाला।

मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोला और पैंटी के ऊपर से चूत सहलाने लगा। उनकी चूत गीली हो चुकी थी। मैंने एक उंगली चूत में डाली, फिर उसे चाटा और आंटी के मुँह में डाल दी। मैंने उनकी पैंटी उतारी और चूत देखने लगा।

आंटी ने फोन काटा और मेरे होंठों को ज़ोर से चूमने लगीं। उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए। मेरे 6 इंच लंबे और 3 इंच मोटे लंड को देखकर बोलीं- मेरे पति का तो बस 4 इंच का है।
वो लंड सहलाने लगीं।

मैंने आंटी को गोद में उठाकर बेड पर लिटाया। हम चूमने लगे। तभी उनका बेटा रोने लगा, और डोरबेल बजी। मैंने कपड़े पहने और देखा, तो पोस्टमैन था। पोस्ट लेकर लौटा, लेकिन आंटी ने कपड़े ठीक कर लिए थे। वो अपनी ननद को लेने चली गईं।

दो दिन बाद मेरे परिवार वाले 5 दिन के लिए गाँव चले गए। अंकल भी बिजनेस के सिलसिले में बाहर थे। आंटी की ननद उनके घर आई हुई थी। मम्मी ने आंटी को मेरा ध्यान रखने को कहा।

आंटी ने मुझे खाने के लिए अपने घर बुलाया। वो काले गाउन में मस्त लग रही थीं। मन कर रहा था कि अभी चोद दूँ, लेकिन उनकी ननद की वजह से ऐसा नहीं कर सका।

हमने साथ खाना खाया और बातें कीं। आंटी ने कहा- तुम यहीं सो जाओ, हम दोनों घर पर अकेली हैं।
मैं रुक गया। आंटी, उनकी ननद और बेटा एक रूम में सो गए, और मैं दूसरे रूम में।

मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं मोबाइल पर अन्तर्वासना की कहानियाँ पढ़कर आंटी के नाम की मुठ मार रहा था कि आंटी मेरे रूम में आ गईं।

मैंने उन्हें बाँहों में लिया और ज़ोर से चूमने लगा। वो भी साथ दे रही थीं। मैंने उनके गाउन के ऊपर से मम्मे दबाए, फिर गाउन उतार दिया। काली ब्रा-पैंटी में वो बहुत खूबसूरत लग रही थीं। मैंने उनकी ब्रा-पैंटी उतारी, और उन्होंने मेरे कपड़े उतार दिए। हम दोनों नंगे एक-दूसरे को देख रहे थे।

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हम फिर चूमने लगे। मैं उनके मम्मों को मसलने और चूसने लगा। एक हाथ से उनकी चूत सहलाने लगा, जो गीली हो चुकी थी। मैंने उनकी चूत चाटी, और वो मेरे बाल पकड़कर चूत पर दबाने लगीं। वो सिसकारियों के साथ झड़ गईं। मैंने उनकी चूत चाटकर साफ की।

आंटी ने मेरा लंड मुँह में लिया और पोर्न की तरह चाटने लगीं। कभी सुपारे पर जीभ फेरतीं, कभी पूरा लंड मुँह में लेतीं। मैं जन्नत में था। थोड़ी देर में मैं उनके मुँह में झड़ गया, और उन्होंने लंड चाटकर साफ किया।

हमने फिर चुम्बन शुरू किया। मैं उनके मम्मे मसलने और चूसने लगा। आंटी बोलीं- अब और नहीं सहन होता, जल्दी चोद दे!

मैंने उनकी चूत और अपने लंड पर तेल लगाया। उनकी चूत टाइट थी, क्योंकि उन्होंने लंबे समय से सेक्स नहीं किया था। मैंने लंड पकड़कर जोर का धक्का मारा। सुपारा चूत में गया, और वो ‘उम्म्ह… अहह… हय… ओह…’ चिल्लाने लगीं। वो लंड निकालने को बोलीं।

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मैंने उनके होंठ चूमे और रुक गया। जब वो नॉर्मल हुईं, तो गांड हिलाने लगीं। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। फिर एक जोरदार धक्के से लंड जड़ तक घुस गया। आंटी की आँखों से आँसू आ गए। मैं रुका और उन्हें चूमने लगा।

वो नॉर्मल हुईं, तो मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। आंटी सिसकारियों के साथ झड़ गईं। चूत की पच-पच आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। मैंने स्पीड बढ़ाई, और लंड उनकी बच्चेदानी को ठोकर मार रहा था। उन्हें मज़ा आने लगा।

जब मेरा होने वाला था, मैंने पूछा- रस कहाँ डालूँ?
वो बोलीं- चूत में ही डाल दो, बहुत दिनों से प्यासी है!
कुछ मिनट की धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए।

मैं उनके ऊपर लेटा रहा। फिर साइड में लेटकर बात करने लगा। मैंने उनकी ननद की चुदाई की बात की, तो वो बोलीं- मैं उससे बात करूँगी।

तभी मेरी नज़र गेट पर पड़ी। उनकी ननद हमें देख रही थी और अपने मम्मे मसल रही थी। मैंने अनदेखा किया और आंटी को ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। कमरे में पच-पच की आवाज़ गूँज रही थी। आंटी कराह रही थीं- आह, मज़ा आ रहा है… और ज़ोर से चोदो!

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जब मेरा वीर्य निकलने वाला था, आंटी ने भी पानी छोड़ दिया। मेरा सारा वीर्य उनकी चूत में निकल गया।

आंटी को डर था कि कहीं वो प्रेग्नेंट न हो जाएँ, तो उन्होंने अगले दिन अपने पति से भी चुदवाया। बाद में आंटी प्रेग्नेंट हो गईं और मुझे बताया कि बच्चा मेरा है। बच्चा होने के बाद वो वहाँ से चली गईं।

वापस उस रात की बात। मैंने आंटी को बताया कि उनकी ननद भी चुदासी है। आंटी ने पूछा- तुम्हें कैसे पता?
मैंने खिड़की की ओर इशारा किया, जहाँ उनकी ननद मम्मे मसल रही थी। आंटी सकपकाईं, फिर अपनी ननद को कमरे में बुलाया।

वो गर्म लौंडिया अंदर आई। हमने मिलकर उनकी ननद को सेक्स का मज़ा चखाया। चूंकि उनकी ननद सील पैक थी, आंटी को लगा कि इसकी चूत की ओपनिंग ज़रूरी है, वरना वो बदनामी कर सकती थी।

मैंने उनकी ननद को बाँहों में लिया और चूमने लगा। आंटी ने उसे नंगा कर दिया। मैंने उसे अपने लंड के नीचे लिया। उसका पहला सेक्स था, तो लंड पेलते ही वो ज़ोर से चिल्लाई। आंटी ने उसका मुँह दबाया और मुझे फुल स्पीड से चुदाई करने को कहा। थोड़ी देर में उसकी सील टूटी, और वो मज़ा लेने लगी।

दो दिन में मैंने उसकी चूत, गांड और मुँह सभी छेद चोद दिए। हम तीनों मस्ती से चुदाई का मज़ा ले रहे थे।

पांच दिन बाद पता चला कि मम्मी को 2-3 दिन और लगेंगे। मुझे मस्ती की और घड़ियाँ मिल गईं। आंटी मेरी रखैल जैसी बन गई थीं, और मैंने उनके साथ हर तरह की चुदाई का मज़ा लिया।

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